पीएम मोदी और स्विस राष्ट्रपति के मिलने से लेकर एक बड़ी डील पक्की होने तक की यह पूरी कहानी काफी दिलचस्प है।

राजनीतिक और आर्थिक नजरिए से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक के बाद एक बहुत बड़ी कामयाबी का जिक्र किया। उन्होंने 'TEPA' (ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट) को भारत की एक ऐतिहासिक जीत बताया, जो यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ हुआ है। पीएम मोदी ने दुनिया को बताया कि यूरोप के किसी भी आर्थिक समूह के साथ भारत का यह पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है। इसके साथ ही, मिलिट्री एक्सचेंज और डिफेंस के हथियार मिलकर बनाने की नई रणनीति ने इस रिश्ते को और भी ज्यादा वजनदार बना दिया है।
कूटनीतिक जानकारों की मानें तो यह बैठक सिर्फ रुपये-पैसे के व्यापार तक नहीं रुकी है। रक्षा क्षेत्र से एक कदम आगे बढ़कर दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) में सहयोग को लेकर जो सहमति बनी है, वो बहुत मायने रखती है। डिफेंस प्रोडक्शन और मिलिट्री एक्सचेंज में साथ आने से भारत और स्विट्जरलैंड के सामरिक (स्ट्रैटेजिक) रिश्ते अब दुनिया के सामने एक नई और पक्की मजबूती के साथ खड़े होंगे।
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन का बयान इस कूटनीतिक मुलाकात की सफलता पर पक्की मुहर लगाता है। उन्होंने इस भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों को एकदम नए मुकाम पर ले जाने वाला मौका बताया। उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि यह साझेदारी हमारे साझा लोकतांत्रिक उसूलों, अटूट भरोसे और सम्मान पर टिकी है। भारत-EFTA TEPA की पहली वर्षगांठ का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि अब दोनों देश मिलकर अपने शानदार आर्थिक भविष्य की रूपरेखा तैयार करेंगे।
भारत और EFTA के बीच जो यह ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) हुआ है, वह कोई मामूली कागज नहीं है। यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को तेजी से दौड़ाने वाला एक बहुत बड़ा औजार बन चुका है। इसका सीधा टारगेट निवेश को खींचना और व्यापारियों के लिए बिजनेस के नए रास्ते खोलना है। स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन का दिल्ली आना इसी बड़े आर्थिक मिशन को रफ्तार देने की एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति है।
इस पूरे कूटनीतिक प्लान को और आगे ले जाने के लिए 7 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है। इस दिन दूसरे भारत-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट का आयोजन होगा, जिसमें खुद गाइ परमेलिन भी मौजूद रहेंगे। यह बड़ा आयोजन TEPA के लागू होने की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए हो रहा है। EFTA ग्रुप में स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन जैसे मजबूत देश आते हैं, और कूटनीतिक तौर पर भारत के लिए इनमें सबसे बड़ा खिलाड़ी स्विट्जरलैंड ही है।



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