भोपाल के सीएम यूथ कॉन्क्लेव में मोहन सरकार द्वारा 2027 से 2 बार पीएससी कराने और 25 हजार रिसर्च फंड देने के पीछे का पूरा प्रशासनिक और रणनीतिक विश्लेषण।

भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित 'सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026' का गहराई से विश्लेषण करें, तो यह सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि युवाओं के असंतोष को दूर करने का एक बड़ा मास्टरप्लान था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 20 हजार युवाओं के सामने जो सबसे बड़ा कार्ड खेला, वो था 2027 से MPPSC परीक्षा को साल में दो बार आयोजित करना। हमारी पड़ताल बताती है कि सालों से लटकी भर्तियों और एक ही चांस मिलने से छात्रों में जो निराशा थी, सरकार ने उसे खत्म करने के लिए यह बहुत ही सधा हुआ प्रशासनिक फैसला लिया है।
हायर एजुकेशन को लेकर सरकार की रणनीति बहुत साफ नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ने रिसर्च करने वाले युवाओं को हर महीने 25 हजार रुपये देने का जो ऐलान किया है, उसका सीधा मकसद प्रदेश के होनहार टैलेंट (ब्रेन ड्रेन) को दूसरे राज्यों में जाने से रोकना है। इसके साथ ही, प्रदेश में 12 नई यूनिवर्सिटी खोलने और आने वाले साल को ‘युवा वर्ष’ के तौर पर मनाने का विजन यह बताता है कि सरकार अब पारंपरिक पढ़ाई से हटकर शिक्षा के ढांचे को बहुत तेजी से बढ़ाना चाहती है।
इस कॉन्क्लेव का अगर तकनीकी विश्लेषण किया जाए, तो साफ दिखता है कि सरकार अब केवल सरकारी नौकरियों के भरोसे नहीं है। कार्यक्रम में एआई (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे विषयों पर जो खास फोकस रखा गया, वो एक बहुत बड़ा शिफ्ट है। सरकार चाहती है कि मध्य प्रदेश का युवा अब आने वाले कल की ग्लोबल डिमांड के हिसाब से खुद को तैयार करे।
इस पूरे आयोजन के पीछे का प्रशासनिक तामझाम भी बहुत बड़ा था। 17 सरकारी विभागों की संयुक्त भागीदारी और 80 से ज्यादा स्टॉल्स का लगना यह बताता है कि सरकार स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर बहुत गंभीर है। मध्य प्रदेश स्टार्टअप सेंटर और सेडमैप के जरिए युवाओं को जो ट्रेनिंग दी गई, उसका सीधा गणित यह है कि सरकार चाहती है कि युवा अब नौकरी मांगने वाले (जॉब सीकर्स) की जगह नौकरी देने वाले (जॉब क्रिएटर्स) बनें, ताकि बेरोजगारी का दबाव कम हो सके।
इतने भारी-भरकम ज्ञान और रोजगार की बातों के बीच, पुलिस विभाग द्वारा साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से बचने के टिप्स देना एक बहुत ही स्मार्ट मूव था, ताकि युवा डिजिटली सुरक्षित रहें। और सबसे अंत में जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे का म्यूजिक कॉन्सर्ट इस पूरी स्ट्रेटजी का एक बेहतरीन हिस्सा था, जिसने यह सुनिश्चित किया कि 20 हजार युवाओं की यह भीड़ पूरी तरह से संतुष्ट और एक सकारात्मक माहौल में अपने घरों को वापस लौटे।



.jpg&w=3840&q=75)
