आखिर कूनो के बाद सरकार ने नौरादेही को ही चीतों का नया घर क्यों चुना? जानिए इस बड़े प्रोजेक्ट और बुंदेलखंड के विकास की पूरी इनसाइड रिपोर्ट।

मध्य प्रदेश के सागर ज़िले के मुहली में ‘वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह’ का समापन, यह बस चीतों की शिफ्टिंग तक ही नहीं रूका था, बल्कि उसमें एक कड़ा सा राजनीतिक संकेत भी घुला हुआ था. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चीतों को रिलीज करते वक्त कहा, “एक पप्पू हमारे यहां है, जो मानता ही नहीं है”. अब अगर इस बात को बारीकी से देखें तो यह विपक्ष पर सीधा-सा तंज माना गया. उन्होंने ये भी जोड़ दिया कि आज दुनिया भारत की ओर उम्मीद से देख रही है, और भगवान ऐसे समय में सबको सद्बुद्धि दें
हमारी रिपोर्ट के मुताबिक, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में चीतों को ले जाने के पीछे वन विभाग का एक लंबा शोध वाला रास्ता रहा है। कूनो नेशनल पार्क से 2 चीतों को मुहली रेंज के खास बोमा में छोड़ा गया. अधिकारियों की मानें तो मुहली रेंज का पर्यावरण चीतों के लिए काफी अनुकूल है इसलिए शुरू में चीतों की निगरानी हेतु, वहां 5 बोमा (विशेष बाड़े) तैयार किए गए
इस चीता प्रोजेक्ट के आर्थिक पहलू पर अगर फोकस करें, तो कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की बात तस्वीर को साफ कर देती है. उनका कहना था कि चीतों की मौजूदगी से सागर और पूरे बुंदेलखंड में पर्यटन की गतिविधि तेजी से बढ़ेगी. यानी होटल, ट्रांसपोर्ट और छोटी दुकानदारियां जैसी चीजों पर असर पड़ेगा, इससे रोजगार का रास्ता बनेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा
स्थानीय लोगों के हिस्से को लेकर भी तैयारी का दावा है. रहली विधायक गोपाल भार्गव की मांगें इस तरफ इशारा करती हैं. उन्होंने मुहली के युवाओं के लिए एक गाइड ट्रेनिंग सेंटर की जरूरत बताई, ताकि युवा विदेशी भाषाओं का अभ्यास कर के टूरिज्म इंडस्ट्री के साथ सीधे जुड़ सकें. साथ ही जिन गांवों को चीतों के लिए खाली करवाया गया, उन विस्थापित परिवारों को छोटे उद्योग शुरू करने के लिए आर्थिक मदद देने की बात भी इसी रिपोर्ट में शामिल है
मध्य प्रदेश सरकार चीतों को लेकर “एक ही टोकरी” वाली सोच नहीं चाहती. नौरादेही में बसाहट के बाद, अब राज्य में कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) के रूप में 3 बड़े ठिकाने उभर आए हैं. यही ‘थ्री-हब’ मास्टरप्लान चीता पुनर्स्थापना योजना को सुरक्षित और लगातार चलाने के लिए कहा जा रहा है
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि खुले जंगल में छोड़ने से पहले सतत निगरानी जरूरी है. इसी वजह से करीब 439 हेक्टेयर का एक तय क्षेत्र तैयार किया गया है. इसी दायरे के भीतर वन विभाग 24 घंटे चीते की सुरक्षा, उनकी सेहत और शिकार करने जैसी गतिविधियों पर नजर रखेगा, ताकि वे नौरादेही के नए माहौल में आराम से ढल सकें



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