आखिर क्यों सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस पर इतना बड़ा आरोप लगाया है? हमारी इस इनसाइड रिपोर्ट में जानिए तुष्टिकरण, नक्सलवाद और पायलट की बहादुरी का पूरा सच।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया बयानों का अगर हम डीप एनालिसिस करें, तो साफ पता चलता है कि वे कांग्रेस को 'तुष्टिकरण' के मुद्दे पर बैकफुट पर धकेलना चाहते हैं। खंडवा में रानी दुर्गावती जयंती के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर कहा कि कांग्रेस नेता सिर्फ अल्पसंख्यक वोट नाराज होने के डर से कैप्टन मच्छार की बहादुरी की तारीफ नहीं कर रहे हैं। इस सियासी हमले के साथ ही सीएम ने गोंड राजवंश के 52 गढ़ों के पूर्व शासकों के वंशजों का सम्मान कर आदिवासी वोट बैंक को भी मजबूत करने की कोशिश की है।
इस बयान की गहराई में जाएं तो मुख्यमंत्री ने जान बचाने वाले एक पायलट की बहादुरी को सीधे तौर पर भारतीय और सनातन संस्कृति से जोड़ दिया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता अपने अल्पसंख्यक वोटों के नुकसान के डर से इस जांबाज की तारीफ करने से बच रहे हैं। सीएम मोहन यादव ने बहुत ही सख्त लहजे में कहा कि वोट के लिए इस तरह की राजनीति करने पर कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए। इसी कड़ी में उन्होंने बालाघाट और आदिवासी इलाकों में कांग्रेस के राज में बढ़े नक्सलवाद को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
इस सियासी रस्साकशी का असली कारण 1 अक्टूबर को हुआ राहुल गांधी का बालाघाट दौरा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी वहां संक्रामक बीमारी और कुपोषण से मरने वाले आदिवासी बच्चों के परिवारों से मिलने पहुंचे थे। राहुल ने वहां के ग्राउंड जीरो से राज्य सरकार के हेल्थ और न्यूट्रिशन मैनेजमेंट को पूरी तरह नाकाम बताया था, जिसकी वजह से राज्य सरकार पर दबाव बन गया था।
राहुल गांधी के उन कड़े आरोपों की धार कुंद करने के लिए मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने शासनकाल के नक्सली रिकॉर्ड की पड़ताल जनता के सामने रख दी। उन्होंने 1999 में बालाघाट में तत्कालीन मंत्री लिखीराम कावरे की नक्सलियों द्वारा की गई हत्या का जिक्र किया। सीएम ने जांच के लहजे में दावा किया कि कांग्रेस के बड़े नेता उस समय उनके परिवार से मिलने नहीं पहुंचे थे। सीएम ने साफ कहा कि अब जब मौजूदा सरकार ने नक्सलवाद पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया है, तब जाकर कांग्रेस के नेता बालाघाट का रास्ता देख रहे हैं।
जिस पायलट की बहादुरी को लेकर यह पूरा सियासी विवाद खड़ा हुआ है, वह केस बहुत ही खौफनाक था। कैप्टन स्मित मच्छार 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के पायलट थे, जो 174 यात्रियों को लेकर दुबई से तेल अवीव जा रही थी। हवा में ही सह-पायलट ने कॉकपिट के अंदर मच्छार पर जानलेवा हमला कर दिया। बुरी तरह घायल होने के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्रियों और क्रू ने अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू कर लिया। विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। इस गजब के साहस के लिए पीएम नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मच्छार से बात कर उनकी तारीफ की थी।



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