समंदर के इतने सुरक्षित माने जाने वाले रूट पर यह हमला कैसे हो गया? हम आपको बताने जा रहे हैं कुवैती जहाज पर हुए हमले की पूरी इनसाइड कहानी।

अगर हम इस पूरे मामले की गहराई में जाएं, तो एक बड़ा सवाल उठकर सामने आता है कि आखिर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे हाई-अलर्ट इलाके में एक तेल टैंकर पर हमला करने की हिम्मत किसने की? कुवैत के झंडे वाले एमटी काजिमाह III (MT Kazimah III) पर जो प्रोजेक्टाइल दागा गया है, वह कोई मामूली घटना नहीं है। इस एक हमले ने खाड़ी क्षेत्र में समंदर के रास्ते होने वाले व्यापार और वहां काम कर रहे हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी पोल खोल कर रख दी है।
हमारी पड़ताल में जो सबसे अहम बात सामने आई है, वो यह कि शुक्रवार को जब यह हमला हुआ, तब यह जहाज टोगो के लोमे बंदरगाह की ओर जा रहा था। जांच के नजरिए से देखें तो यह रूट हमेशा से व्यापार के लिए बहुत खास रहा है। इस जहाज पर उस वक्त 5 भारतीय मौजूद थे। ओमान में भारतीय दूतावास ने जैसे ही यह खबर सुनी, उन्होंने तुरंत लोकल अधिकारियों के साथ मिलकर एक बड़ा ऑपरेशन चलाया। इस बढ़िया तालमेल का ही नतीजा था कि हमारे पांचों नागरिकों को बिना किसी नुकसान के बाहर निकाल लिया गया।
इस पूरे रेस्क्यू के बाद ओमान स्थित भारतीय मिशन ने यह तो साफ कर दिया कि किसी भी भारतीय को कोई नुकसान नहीं हुआ है और उन्होंने ओमान के अधिकारियों का शुक्रिया भी किया। लेकिन जांच के पॉइंट ऑफ व्यू से सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है। अभी तक हमलावर पक्ष की कोई आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई है। एक बहुत बड़ा खतरा है। पहले से चल रही टेंशन के बीच, बिना नाम वाले ऐसे हमले समंदर में काम कर रहे बाकी जहाजों के लिए बहुत बड़ा रिस्क बन गए हैं।
इस हमले के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल द्वारा 29 सितंबर को दिए गए डेटा का विश्लेषण करना बहुत जरूरी हो जाता है। उन्होंने साफ बताया था कि फारस की खाड़ी में हमारे 4,500 से ज्यादा नाविक मौजूद हैं। अगर हम सिर्फ कोर व्यापार की बात करें तो 6 भारतीय झंडे वाले जहाज और 6 विदेशी जहाज (कुल 12 जहाज) भारत का माल लेकर चल रहे हैं, जिन पर हमारे 163 नाविक सवार हैं। अब यह हमला होने के बाद शिपिंग मंत्रालय इन सभी आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए बहुत ही बारीकी से हर जहाज की आवाजाही ट्रैक कर रहा है।



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