वजह थी कानूनी सुरक्षा की आशंका, कार्रवाई और वेतन विसंगति। सहमति बनी, पर आदेश आने बाकी हैं।

पटवारी सामूहिक अवकाश पर क्यों गए थे और सुलह के बाद भी क्या अधर में है? शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद स्वामित्व योजना पर सरकार और पटवारी संघ का विवाद खत्म हो गया है। संघ 12 अक्टूबर से काम दोबारा शुरू करेगा। इस विवाद से योजना में जमीनों के पंजीयन का काम प्रभावित हो रहा था।
स्वामित्व योजना का काम पूरा कराने को लेकर कुछ दिनों से सरकार और पटवारियों के बीच तनाव था। योजना में अपेक्षित प्रगति न होने पर सरकार ने कई जिलों में कार्रवाई की। 8 अक्टूबर की नईदुनिया रिपोर्ट के मुताबिक सात जिलों में 27 प्रोबेशनर पटवारियों की सेवाएं समाप्त की गईं। इसके विरोध में पटवारी संघ ने सामूहिक अवकाश और सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने का फैसला किया।
पटवारियों की मुख्य मांग थी कि जमीन के पंजीयन से जुड़े विवादों में उन्हें कानूनी सुरक्षा मिले। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार पटवारियों को आशंका थी कि जमीन के रिकॉर्ड और पंजीयन के किसी विवाद में उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए संघ सुरक्षा के स्पष्ट नियम बनाने की मांग कर रहा था। आंदोलन के दौरान हुई विभागीय कार्रवाई वापस लेने और वेतन की समस्याएं सुलझाने की मांग भी रखी गई थी।
मामला न सुलझा तो संघ के पदाधिकारी उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मिले। 9 अक्टूबर की इस बैठक के बाद भी संघ ने मांगें पूरी होने तक काम पर न लौटने की बात कही थी। फिर मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में सहमति बनी और स्थिति बदल गई।
सहमति के मुताबिक कानूनी संरक्षण के लिए जरूरी आदेश जारी किए जाएंगे। 17 सितंबर के बाद पटवारियों पर हुई विभागीय कार्रवाई वापस लेने पर भी सहमति की बात सामने आई है। पर इन फैसलों को लागू करने के लिए सरकारी आदेश जरूरी है, इसलिए असल तस्वीर आदेश आने के बाद ही साफ होगी।
वेतन विसंगति पर भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर के अनुसार सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। आयोग के गठन के बाद आगे विचार की बात कही गई है। 27 अक्टूबर को पटवारियों के महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा का आश्वासन भी मिला है। अब संघ की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है।
स्वामित्व योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार हो रहा है और लोगों को संपत्ति के दस्तावेज मिल रहे हैं। मध्य प्रदेश में करीब 50 लाख संपत्तियों के पंजीयन का लक्ष्य है। पटवारियों की भूमिका अहम है, इसलिए उनके लौटने से प्रक्रिया दोबारा आगे बढ़ने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी बैठक की जानकारी साझा की। पटवारी संघ ने काम पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ाने का भरोसा दिया है। अब 12 अक्टूबर से काम शुरू होने और सरकार के वादों पर अमल का इंतजार है।



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