रीवा में बायपास निर्माण के चलते भारी वाहनों का दबाव शहर की मुख्य सड़कों पर बढ़ गया है। धूल के गुबार से लोग परेशान हैं और AQI 75-80 तक पहुंच गया।
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रीवा। शहर में निर्माणाधीन बायपास और डायवर्सन मार्गों की बदहाली का असर अब शहर की मुख्य सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बायपास में पुलिया निर्माण और सड़क चौड़ीकरण के चलते भारी वाहनों का रूट बदलने से मॉडल रोड और रीवा-सीधी मार्ग पर ट्रकों की आवाजाही बढ़ गई है। रातभर सैकड़ों भारी वाहनों के गुजरने से सड़क पर धूल के गुबार उठ रहे हैं और दिन में भी कई इलाकों में धुंध जैसी स्थिति नजर आ रही है।
जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों हुई भारी बारिश के दौरान निर्माणाधीन बायपास के डायवर्सन मार्ग दलदल में तब्दील हो गए। इसके बाद भारी वाहनों की आवाजाही एक बार फिर शहर के अंदर के रास्तों से होने लगी।
रतहरा से पड़रा तक और मॉडल रोड से लेकर जयस्तंभ से शुरू होने वाले रीवा-सीधी मार्ग पर ट्रेलर, कैप्सूल, हाइवा और अन्य भारी वाहन बड़ी संख्या में गुजर रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रात करीब 11 बजे से सुबह 7:30 बजे तक वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क पर धूल का गुबार बना रहता है।
भारी वाहनों के गुजरने से उड़ने वाली धूल का असर आसपास रहने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है। सड़क किनारे स्थित मकानों की खिड़कियों और रोशनदान के जरिए धूल घरों के अंदर तक पहुंच रही है। बाइक, स्कूटर और ऑटो से सफर करने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, खुले वाहनों में सफर करने वाले कई लोग धूल से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। पैदल चलने वालों को भी धूल के कारण आंख, नाक और मुंह में परेशानी होने की शिकायत है।
पिछले दो दिनों में शहर का AQI करीब 75 से 80 के आसपास बताया जा रहा है। हालांकि यह स्तर सामान्य तौर पर सभी स्वस्थ लोगों के लिए तत्काल गंभीर श्रेणी में नहीं माना जाता, लेकिन संवेदनशील लोगों को प्रदूषण से ज्यादा परेशानी हो सकती है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्या वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
धूल की समस्या का असर शहर के उन इलाकों में भी दिखाई दे रहा है जहां वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी आवास हैं। रतहरा से कमिश्नर बंगले तक सड़क पर धूल के गुबार की स्थिति बताई जा रही है। सिविल लाइन क्षेत्र में भी सड़क से उड़ने वाली धूल लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जाए तो धूल की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लोगों ने प्रशासन से दिन में कम से कम दो-तीन बार टैंकर से पानी का छिड़काव कराने और भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने की मांग की है। फिलहाल बायपास निर्माण के चलते शहर के भीतर बढ़े भारी वाहनों के दबाव और धूल की समस्या से लोगों को राहत मिलने का इंतजार है।



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