रीवा के चाकघाट नगर परिषद के प्रभारी CMO शंखधर पांडेय को महिला कर्मचारी से फोन पर अमर्यादित और अशोभनीय बातचीत के मामले में निलंबित किया गया है। कलेक्टर की जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद कमिश्नर ने कार्रवाई की।
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रीवा। चाकघाट नगर परिषद के प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) शंखधर पांडेय को महिला कर्मचारी से फोन पर अमर्यादित और अशोभनीय बातचीत के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने बुधवार को निलंबन के आदेश जारी किए। इससे एक दिन पहले मंगलवार को महिला कर्मचारी ने कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम से मामले की जांच कराई गई, जिसमें फोन पर अशोभनीय बातचीत का आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया गया।
महिला कर्मचारी का आरोप है कि अधिकारी ने फोन पर उससे निजी तौर पर अनुचित अपेक्षा रखी। महिला के मुताबिक, जब उसने इसका विरोध किया तो उसके खिलाफ नौकरी से हटाने की कार्रवाई की गई। शिकायत में महिला ने अभद्र व्यवहार, नौकरी से निकालने की धमकी, वेतन नहीं मिलने और ईपीएफ की राशि जमा नहीं किए जाने जैसे आरोप भी लगाए हैं।
मामले से जुड़ा एक ऑडियो भी सामने आया है। इसमें अधिकारी की आवाज में महिला कर्मचारी से निजी तौर पर कमरे में समय बिताने की बात किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज वास्तव में किसकी है, इसकी अंतिम पुष्टि जांच का विषय है।
महिला कर्मचारी ने मंगलवार को कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर ने एसडीएम को मामले की जांच के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट में महिला कर्मचारी से फोन पर अमर्यादित और अशोभनीय बातचीत के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद कलेक्टर की ओर से प्रभारी CMO के निलंबन का प्रस्ताव कमिश्नर कार्यालय भेजा गया।
कलेक्टर के प्रतिवेदन के आधार पर रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने शंखधर पांडेय के निलंबन के आदेश जारी किए। आदेश में कहा गया है कि कलेक्टर रीवा द्वारा कराई गई जांच में कार्यालय की महिला कर्मचारी के साथ फोन पर अमर्यादित और अशोभनीय वार्तालाप के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।
निलंबन अवधि के दौरान शंखधर पांडेय का मुख्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन कार्यालय रीवा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के तहत की गई है।
महिला कर्मचारी ने शिकायत में नौकरी से हटाने, वेतन और ईपीएफ से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। फिलहाल जांच में फोन पर अमर्यादित और अशोभनीय बातचीत का आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया गया है। वहीं सामने आए ऑडियो की आवाज की अंतिम पुष्टि और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर आगे की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।