कथित 108 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई कानूनी प्रयासों के बाद सौरभ शर्मा को हाई कोर्ट से नियमित जमानत मिली। जानिए पूरे केस का घटनाक्रम।
भोपाल। कथित 108 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और आय से ज्यादा संपत्ति वाले मामले में RTO के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। जबलपुर हाई कोर्ट ने उन्हें 10 लाख रुपये के निजी मुचलके पर नियमित जमानत दे दी… अदालत ने ये भी माना कि फिलहाल मामले की जांच पूरी हो चुकी है, आरोप तय हो चुके हैं, और ट्रायल जल्द ही पूरा होने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है। इसी तरह की परिस्थितियों को देखते हुए जमानत मंजूर की गई।
सौरभ शर्मा का मामला तब सुर्खियों में आया जब जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई करनी शुरू कर दी। जांच के दौरान उनके पास करीब 52 किलोग्राम सोना और लगभग 11 करोड़ रुपये नकद मिलने का दावा किया गया। इसके बाद मामला कथित 108 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग, और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जोड़ दिया गया, और फिर ये मामला प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शुमार हो गया।
सौरभ शर्मा ने पहले जिला अदालत, फिर हाई कोर्ट में नियमित जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। लेकिन दोनों जगह उनकी याचिकाओं को अदालत ने खारिज कर दिया। उन्होंने पत्नी की बीमारी का हवाला देकर अंतरिम जमानत भी मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया। अब जब जांच पूरी हो गई है और आरोप तय हो चुके हैं, तब हाई कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी है।
जबलपुर हाई कोर्ट की जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और ट्रायल जल्दी खत्म होने की संभावना नहीं है। कोर्ट ने इसी तरह की वजहों को आधार बनाकर सौरभ शर्मा को नियमित जमानत देने का फैसला किया।
अपने आदेश में हाई कोर्ट ने ये साफ कहा कि जमानत का मतलब ये नहीं है कि आरोपी को दोषमुक्त मान लिया गया है। अदालत का कहना है कि ये आदेश सिर्फ कानूनी प्रक्रिया और मौजूदा हालात के आधार पर दिया गया है। मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी, और अंतिम फैसला सभी साक्ष्यों, तथा दोनों पक्षों की दलीलों को देखकर किया जाएगा।



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