सिंगरौली में ABVP ने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की उठाई मांग, उच्च शिक्षा मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन 2017 से बंद हैं छात्रसंघ चुनाव, लोकतांत्रिक भागीदारी पर सवाल|
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सिंगरौली। मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग अब सिंगरौली में भी जोर पकड़ने लगी है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर उच्च शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और प्रदेश में जल्द से जल्द छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की। परिषद का कहना है कि साल 2017 से चुनाव बंद होने के कारण विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सीधे तौर पर भाग लेने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
ABVP ने अपने ज्ञापन में कहा कि छात्रसंघ चुनाव को केवल राजनीतिक गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। चुनाव विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक सोच, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। छात्रसंघ के जरिए विद्यार्थी कॉलेज और विश्वविद्यालय से जुड़ी अपनी समस्याओं को एक संगठित मंच पर उठा सकते हैं और उनके समाधान के लिए प्रशासन के सामने अपनी बात रख सकते हैं। परिषद का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से छात्रों में नेतृत्व की समझ विकसित होती है और भविष्य के लिए नई नेतृत्वकारी पीढ़ी तैयार होती है।
सीधी-सिंगरौली जिले के ABVP संयोजक निखिल वर्मा ने कहा कि लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्रों की इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए और जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाए। वर्मा के मुताबिक, चुनाव बहाल होने से विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं रखने के लिए एक लोकतांत्रिक मंच मिलेगा और कॉलेजों में नेतृत्व की नई पौध तैयार होगी।
ABVP ने छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग के समर्थन में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों का भी हवाला दिया है। परिषद का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरकार की ओर से पहले चुनाव कराने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अभी तक चुनाव से संबंधित कोई आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है। ऐसे में छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ज्ञापन के माध्यम से ABVP ने प्रदेश सरकार से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव जल्द बहाल करने और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग की है। परिषद का कहना है कि विद्यार्थी लंबे समय से इस प्रक्रिया की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। अब सरकार को इस दिशा में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। सिंगरौली में उठी यह मांग बताती है कि छात्र राजनीति को लेकर विद्यार्थियों के बीच फिर से हलचल शुरू हो गई है और अब निगाह सरकार के अगले कदम पर टिकी है।