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संसद का मानसून सत्र शुक्रवार को भारी हंगामे के बीच समाप्त हो गया। हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण विवाद और राज्यसभा में खनन विधेयक पास होने जैसे मुद्दों के बीच लोकसभा महज चार मिनट चली।
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र शुक्रवार को भारी गतिरोध,और राजनीतिक उठापटक के बीच अनिश्चितकाल के लिए लगभग खत्म हो गया, कहा जाए तो। सत्र के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सदन में मौजूद रहे। जैसे ही राष्ट्रगीत की धुन बजने लगी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही चार मिनट से भी कम समय तक सिमटी रही। दूसरी तरफ, उच्च सदन यानी राज्यसभा की बैठक करीब एक घंटे चलती दिखी, जहां तमाम विरोध के बीच खनन संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इस बार के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक संवेदनशील मुद्दे ने सदन की हवा कुछ ज्यादा ही गरम कर दी। खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में अपने कार्यक्रम के बाद सभास्थल के कथित 'शुद्धिकरण' और हवन कराने वाली बात को प्रमुखता से रखा। उन्होंने इसे दलित समाज के अपमान से सीधे तौर पर जोड़ते हुए, कड़ा सवाल किया कि उनके वहां से निकल जाने के बाद ऐसी प्रक्रिया की जरूरत क्यों हुई। इस बयान के बाद सदन में भारी हंगामा खड़ा हो गया, फिर मंत्री स्तर पर माहौल को संभालने की कोशिश हुई। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सदन को यह कहते हुए आश्वस्त किया कि सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाएगी, और इस मुद्दे पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सत्र के अंतिम पड़ाव पर राज्यसभा में एक घंटे के कामकाज के दौरान विधाई मोर्चे पर भी एक अहम कदम उठाया गया। इस दौरान खनन कानून में संशोधन से जुड़े विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। नए प्रावधानों के अनुसार, अब राज्यों को खनिज और खदानों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त कर, शुल्क (ड्यूटी) या सेस लगाने से पहले केंद्र सरकार की औपचारिक स्वीकृति लेना जरूरी होगा।
बीते 20 जुलाई से शुरू हुए इस पूरे मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन की वजह से कोई ठोस कामकाज नहीं हो सका। विपक्ष बार बार छात्र आंदोलन के दौरान संसद मार्च पर हुए लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल वाले मुद्दे को उठाता रहा। उनका कहना रहा कि यह आदेश किसने दिया था और उसके लिए जवाब मांगा गया। हालांकि, बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह ने यह जरूर कहा था कि अगर विपक्ष सदन की कार्यवाही चलने दे, तो वे हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा में इस विषय पर चर्चा नहीं हो पाई।
सभापति सीपी राधाकृष्णन की तरफ से साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्यसभा इस पूरे मानसून सत्र में कुल 37 घंटे 49 मिनट तक संचालित हुई। अब जब मानसून सत्र औपचारिक तौर पर अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है, तो राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि भविष्य में एक 'विशेष सत्र' बुलाया जा सकता है। इसके अलावा, सत्र खत्म होने के बाद सभी बड़े राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं की लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से औपचारिक मुलाकात को लेकर भी खबरें सामने आई हैं।
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