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ओंकारेश्वर में शुरू हुए पंचायतन मंदिर निर्माण के पीछे का आध्यात्मिक, तकनीकी और वास्तु विश्लेषण। जानिए 80 हजार घन फीट गुलाबी पत्थर और सोमतिलक शिखर का पूरा गणित।

खंडवा के ओंकारेश्वर स्थित मांधाता पर्वत पर आज शुरू हुआ पंचायतन मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और अद्वैत दर्शन को पुनर्जीवित करने का एक बड़ा वैज्ञानिक प्रोजेक्ट है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 45 पवित्र शिलाओं के पूजन के साथ इस मंदिर का शुभारंभ किया गया। हमारी पड़ताल बताती है कि यह मंदिर परिसर मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्रों में से एक बनने जा रहा है।
एकात्म धाम में धर्माचार्यों की उपस्थिति में हुए इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की मूल पंचायतन परंपरा को पुनर्जीवित करना है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के कल्याण की प्रार्थना के साथ-साथ यह संदेश भी दिया गया कि राज्य सरकार अपनी विकास योजनाओं के केंद्र में सांस्कृतिक विरासत और दार्शनिक मूल्यों को प्रमुखता से रख रही है।
इस विशाल आयोजन के प्रबंधन का विश्लेषण करें तो राज्य सरकार ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए त्रिस्तरीय ढांचा तैयार किया था। कैबिनेट मंत्री विजय शाह के साथ संभाग आयुक्त भास्कर लक्ष्यकार, आईजी अनुराग, कलेक्टर ऋषव गुप्ता और एसपी अगम जैन की सीधी निगरानी में पूरी व्यवस्था संचालित हुई, जो यह दर्शाती है कि शासन स्तर पर इस प्रोजेक्ट को कितना उच्च महत्व दिया जा रहा है।
डेटा के अनुसार, 'आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास' इस पूरे प्रोजेक्ट को दो चरणों में क्रियान्वित कर रहा है। फेज-1 में 108 फीट ऊंची 'एकात्मता की मूर्ति' पहले ही स्थापित की जा चुकी है। वहीं फेज-2 में ₹2,195 करोड़ की अनुमानित लागत से 'अद्वैत लोक' संग्रहालय का निर्माण चल रहा है। यह बजट इसे देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल करता है।
मुख्यमंत्री के वक्तव्य का विश्लेषण करने पर सामने आता है कि सरकार ओंकारेश्वर को आगामी उज्जैन सिंहस्थ से सीधे जोड़ रही है। सिंहस्थ से पहले प्रस्तावित देशव्यापी 'एकात्म यात्रा' का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पूरे देश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर और आदि शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत से सीधे कनेक्ट करना है।
इंजीनियरिंग और वास्तु के अनुसार, पंचायतन शैली में केंद्र में शिव और चारों कोनों—ईशान (विष्णु), आग्नेय (सूर्य), नैऋत्य (गणेश) और वायव्य (शक्ति) पर उप-मंदिर होंगे। मंदिर का शिखर 'सोमतिलक' शैली में और गर्भगृह 'सर्वतोभद्र' (चारों दिशाओं से प्रवेश) शैली पर बनेगा। 16 फीट ऊंची जगति पर 80,000 घन फीट गुलाबी बलुआ पत्थर से 100 खंभे, 26 फीट व्यास का गुंबद, 8 लघु संवर्णा और 121 स्वर्णिम कलश स्थापित किए जाएंगे, जो इसे सदियों तक अक्षुण्ण रखेंगे।
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