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नेपाल में भोटेकोशी नदी के किनारे आई भीषण तबाही का तकनीकी और जमीनी विश्लेषण। जानिए कैसे 5.2 तीव्रता के लैंडस्लाइड शॉक ने जलप्रलय का रूप ले लिया और 300 भारतीयों सहित सैकड़ों जिंदगियां लापता हो गईं।

नेपाल के रसुवा जिले और तिब्बत सीमा पर घटी विनाशकारी बाढ़ की घटना का यदि गहराई से तकनीकी और भौगोलिक विश्लेषण किया जाए, तो यह साफ होता है कि यह केवल एक मौसमी आपदा नहीं बल्कि एक विशाल भूगर्भीय घटना थी। इस आपदा में अब तक 178 लोगों की मौत दर्ज हो चुकी है, जिसमें नेपाल में 165 और तिब्बत में 3 मौतें शामिल हैं। लगभग 1,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जो इस त्रासदी की भयावहता को दर्शाते हैं।
डेटा विश्लेषण के अनुसार, बुधवार सुबह 8:37 बजे काठमांडू के उत्तर में स्थित ल्हेंदे खोला नदी बेसिन में यह घटना घटी। शुरुआत में अमेरिकी एजेंसी (USGS) के सिस्मोग्राफ ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया था। लेकिन वास्तविक जांच में सामने आया कि पहाड़ का एक विशालकाय ग्लेशियर और चट्टानी हिस्सा टूटकर ल्हेंदे खोला में गिरा, जो आगे जाकर भोटेकोशी नदी में मिलती है। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इस प्रक्रिया को पूरी तरह समझने में अभी कई हफ्तों का समय लगेगा।
USGS ने अपने उन्नत डेटा में स्पष्ट किया कि यह कोई पारंपरिक भूकंप नहीं था। पहाड़ से गिरे मलबे का वजन इतना अप्रत्याशित था कि जमीन से टकराते ही उसने 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर तीव्र गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) उत्पन्न की। यानी जमीन के कांपने की वजह स्वयं भूस्खलन था, जिसने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को अचानक अवरुद्ध कर दिया।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में 300 से अधिक भारतीय नागरिक लापता हैं। नेपाल में 165 शवों की पुष्टि हो चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और कामगारों के लिए कितना महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट था।
जांच पड़ताल से यह प्रमाणित होता है कि बाढ़ का मुख्य केंद्र तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र था, जहां 558 लोग लापता हैं। तिब्बत की ऊपरी घाटियों से निकला जलप्रवाह और गाद जब संकरी घाटियों से होकर नेपाल में घुसा, तो उसने मध्य नेपाल के हाइड्रोपावर और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्वस्त कर दिया।
नेपाली सेना द्वारा चलाए गए अभियान में रसुवा के टिमुरे से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जिसमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। साथ ही एक निर्माणाधीन टनल में वायु प्रवाह रुकने से पहले 7 नेपाली कामगारों को सुरक्षित बाहर निकालना एक बड़ी तकनीकी सफलता रही।
हाइड्रोलॉजिकल डेटा के अनुसार, नेपाल की त्रिशूली नदी का अतिरिक्त पानी गंडक में आ रहा है, जिससे 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव की चेतावनी जारी की गई है। बिहार के 6 प्रमुख जिलों—पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में हाई अलर्ट है। इसके अलावा सीतामढ़ी, शिवहर और यूपी के महाराजगंज व कुशीनगर के तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
भारत सरकार ने अपनी त्वरित आपदा प्रतिक्रिया नीति के तहत 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां काठमांडू पहुंचाई हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि भारत पड़ोसी देश के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने आपातकालीन संचार स्थापित करने के लिए हेल्पलाइन नेटवर्क शुरू किया है। मौके पर चीनी अधिकारियों के नंबर 0086 139 8999 0012 के साथ बीजिंग दूतावास के 0086 185 1428 4905 और काठमांडू दूतावास के +977 985 131 6807 व +977 970 910 7500 नंबर जारी किए गए हैं।
आपदा के बाद पूर्व सूचना साझा न करने के आरोपों पर नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने विस्तृत खंडन जारी किया है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि सूचना छिपाने के दावे तथ्यहीन हैं और प्राकृतिक आपदाओं के रियल-टाइम डेटा को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है।
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