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नेपाल में आयोजित इंडो-नेपाल इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट में उज्जैन की विधि शर्मा और उत्कर्षा पाल ने चीन की टीम को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। इस ऐतिहासिक जीत से विश्वविद्यालय और शहर में जश्न का माहौल है।
नेपाल में हुए इंडो-नेपाल इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट में उज्जैन की दो बेटियों ने,अपने शानदार खेल हुनर के सहारे, देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सचमुच रोशन कर दिया है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की छात्रा विधि शर्मा और उत्कर्षा पाल ने डबल्स के इस प्रतिष्ठित मुकाबले में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल में भारतीय जोड़ी ने चीन की कड़ी मानी जाने वाली टीम को करारी शिकस्त दे दी ,और फिर गोल्ड मेडल भारत की झोली में आ गिरा।
टूर्नामेंट शुरू होने से ही विधि शर्मा और उत्कर्षा पाल ने कोर्ट पर एक ऐसा तालमेल दिखाया कि सामने वाली जोड़ी को सांस ही नही मिल रही थी। दोनों खिलाड़ियों ने लगातार ऊंचे स्तर का खेल बरकरार रखा ,और इसी के चलते वे फाइनल तक पहुंच गईं। डबल्स के दौरान उन्होंने सही ढंग से प्लानिंग की, और अपनी खेल समझ के दम पर, टूर्नामेंट की मजबूत टीमों को भी कड़ी टक्कर दी।
खिताबी भिड़ंत भारत और चीन की टीमों के बीच खेली गई। ये मैच दबाव भरा था, पर उज्जैन की दोनों बेटियों ने बेहद संयम के साथ साथ आक्रामक अंदाज़ में भी खेल दिखाया। विधि और उत्कर्षा ने एक-दूसरे का पूरा साथ निभाया, और चीन की टीम को धूल में मिला कर, भारत के लिए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की इन दोनों छात्राओं की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न सिर्फ शिक्षण संस्थान, बल्कि पूरे उज्जैन शहर में उत्सव का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस बड़ी कामयाबी के बाद, विश्वविद्यालय प्रशासन, खेल जगत के नामचीन लोग, और स्थानीय नागरिक लगातार उन्हें बधाइयां दे रहे हैं,और तरह तरह के शुभकामनाएं भी।
जानकारों और खेल प्रेमियों के मुताबिक विधि और उत्कर्षा की ये सफलता उज्जैन के उभरते हुए युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा संकेत और प्रेरणा बन सकती है। इस जीत से ये बात भी सामने आती है कि छोटे शहरों से जुड़ी प्रतिभाएं ,कड़े अनुशासन, लगातार मेहनत और नियमित अभ्यास के जरिए ,अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग और मजबूत पहचान जरूर बना सकती हैं।
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