गौहनिया-रीवा हाईवे पर सैकड़ों आवारा पशुओं से हादसे बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पशुओं को हटाने और हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की।

रीवा : प्रयागराज के गौहनिया-रीवा नेशनल हाईवे पर इन दिनों सफर करना राहगीरों के लिए खतरे से खाली नहीं है। जारी, मिश्रा बांध, सड़वा और बरेठिया के आसपास हाईवे पर सैकड़ों आवारा पशु दिन-रात सड़क पर घूमते नजर आ रहे हैं। कई बार मवेशी सड़क के बीचोंबीच बैठ जाते हैं और अचानक वाहनों के सामने आ जाते हैं। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर आवारा पशुओं की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई बाइक सवार सीधे मवेशियों से टकरा जाते हैं, जबकि तेज रफ्तार कार और अन्य वाहन चालक अचानक ब्रेक लगाने के कारण नियंत्रण खो बैठते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, अब तक दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं। वहीं, कुछ लोगों की मौत होने की आशंका भी जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पशुओं को सड़क से नहीं हटाया गया तो बड़ी दुर्घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों के मुताबिक, हाईवे पर घूमने वाले ज्यादातर मवेशियों के कान में पीले रंग के टैग लगे हुए हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि जब इन पशुओं की पहचान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, तो फिर इन्हें सड़क पर खुले में घूमने के लिए क्यों छोड़ दिया गया है? उनका आरोप है कि पशुओं के कान में टैग लगाने तक कार्रवाई सीमित रह गई, लेकिन उन्हें गौशाला या कान्हा उपवन तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं की गई।
आवारा पशुओं का संकट सिर्फ हाईवे तक सीमित नहीं है। गांवों में किसान भी इन मवेशियों से परेशान हैं। इन दिनों धान की फसल पककर तैयार है। दिन में किसान किसी तरह खेतों की रखवाली कर लेते हैं, लेकिन रात होते ही 20 से 30 पशुओं का झुंड खेतों में घुस जाता है और खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाता है। किसान बताते हैं कि रात-रातभर लाठी लेकर खेतों में जागना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती करना पहले ही मुश्किल है, ऊपर से आवारा मवेशियों ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।
इलाके के लोगों ने प्रयागराज के जिलाधिकारी से मांग की है कि गौहनिया-रीवा हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं को तत्काल हटाकर गौशालाओं में भेजा जाए। साथ ही, हाईवे पर रात के समय पेट्रोलिंग बढ़ाने और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी की व्यवस्था करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़क से मवेशियों को नहीं हटाया जाएगा, तब तक हादसों का खतरा बना रहेगा। उनका साफ कहना है कि अब प्रशासन कुछ करे, नहीं तो कबहूं बड़ा हादसा होइ सकत है।
सवाल यह भी है कि अगर पशुओं की पहचान के लिए टैग लगाए गए हैं, तो उनकी निगरानी और सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? हाईवे पर बैठे मवेशी राहगीरों के साथ-साथ खुद भी खतरे में हैं। जरूरत है कि संबंधित विभाग सड़क से पशुओं को हटाने के साथ उनकी उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें और हाईवे के संवेदनशील हिस्सों में नियमित पेट्रोलिंग कराई जाए। समय रहते कदम उठाए गए तो हादसों को रोका जा सकता है, वरना किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करना सिर्फ खानापूर्ति साबित होगा।



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