5% हिस्सेदारी, मालवा की पहचान और मौसम की चुनौतियों में किसानों का योगदान: यही मुख्य बिंदु रहे।

मध्यप्रदेश को सोयाबीन का इतना बड़ा केंद्र क्यों माना जा रहा है, और इस उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और उद्योग क्या चाहते हैं? इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार (16 अक्टूबर) को सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के दो दिवसीय 9वें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन सवालों पर अपनी बात रखी। कॉन्क्लेव 16 और 17 अक्टूबर को है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत मध्य प्रदेश में होता है। उन्होंने मालवा को सोयाबीन की राजधानी बताया और सोया प्रोसेसिंग, खाद्य तेल उद्योग और कृषि आधारित निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनके मुताबिक प्रदेश को देश की फूड बास्केट के रूप में पहचान मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती और सोयाबीन उत्पादन प्रदेश की अर्थव्यवस्था के बड़े आधार हैं। खराब मौसम और अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों ने सोयाबीन उत्पादन में बड़ा योगदान दिया। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती की उत्पादकता सुधारने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए जुटी है। उन्होंने कहा कि सोयाबीन किसानों की आमदनी, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण व्यवस्था से भी जुड़ा है।
सोपा के चेयरमैन नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण में कहा कि मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और राज्य सरकार किसानों के हित में फैसले ले रही है। उन्होंने भावांतर योजना का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों को उपज की कीमत में अंतर की राशि देने की पहल अहम है। उन्होंने सोया उद्योग के विकास के लिए सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन की जरूरत पर भी जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन की प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में विकास की संभावनाएं हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता और उत्पादों में विविधता से क्षेत्र मजबूत हो सकता है। खाद्य तेल उद्योग के विस्तार से भारत आत्मनिर्भर बन सकता है, और प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत के साथ भंडारण, विपणन और मूल्य संवर्धन के मौके मिलेंगे।
मुख्यमंत्री के अनुसार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में प्रदेश को करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे और 30 प्रतिशत से अधिक धरातल पर उतारे जा चुके हैं। सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा में काम कर रही है, निवेशकों से संवाद चल रहा है और उद्योग विस्तार के लिए कार्यक्रम हो रहे हैं। जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़कर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जिसकी विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) को गुरुवार (15 अक्टूबर) को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। सस्ती बिजली, जमीन और पानी निवेशकों को आकर्षित करते हैं। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से इलाकों के संसाधन और संभावनाएं सामने आई हैं, और सरकार का लक्ष्य स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और क्षेत्रीय रोजगार बढ़ाना है। युवाओं के रोजगार, औद्योगिक निवेश और किसानों की आय के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में मिलकर प्रयास हो रहे हैं, जिनमें सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कॉन्क्लेव की थीम 'आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन' है। इसका मकसद खाद्य तेल और सोयाबीन क्षेत्र की दिशा तय करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना है। देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, उद्योगपति, नीति निर्माता और किसान शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रोसेसिंग, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में उल्लेखनीय काम करने वाली कंपनियों के करीब 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों को सम्मानित किया, और नरेश गोयनका ने उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट किया। मंच पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सुमित मिश्रा, सोपा के डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी, डेविश जैन, कृष्णवीर और विजय पाल समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।



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