यह भेंट सामान्य संवाद है या इसके पीछे कोई खास वजह, इस सवाल का जवाब फिलहाल सामने नहीं आया।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक बार फिर हुई भेंट के पीछे क्या है, यह सवाल मध्य प्रदेश की राजनीति में उठ रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री मिश्रा की इस भेंट का मकसद सामने नहीं आया है, और नरोत्तम मिश्रा या हेमंत खंडेलवाल ने इस पर कुछ कहा नहीं है।
जानकारों के सामने दो ही तस्वीरें हैं। एक यह कि इसके पीछे कोई खास राजनीतिक वजह हो, दूसरी यह कि यह पार्टी के अंदर चलने वाले सहज संवाद का हिस्सा हो। इनमें से कौन सही है, इसका कोई प्रमाण फिलहाल नहीं है। सियासी पंडितों का कहना है कि सियासत में कुछ भी अकारण नहीं होता और पूर्व मंत्री की बार-बार की भेंट में बड़े संकेत हो सकते हैं।
मिश्रा को दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिल पाया। फिर भी जानकारों की नजर में वे प्रदेश की सियासत के पुराने खिलाड़ी हैं और बड़े से बड़े विश्लेषक उन्हें हाशिये का नेता नहीं मानते। जानकारों के अनुसार इसी अनुभव के कारण भेंट पर अटकलें तेज हैं।
मिश्रा मध्य प्रदेश भाजपा के प्रमुख नेताओं में हैं और राज्य सरकार में गृह मंत्री का पद संभाल चुके हैं। हेमंत खंडेलवाल इस समय पार्टी के प्रदेश संगठन की अगुवाई कर रहे हैं। इसलिए इनकी मुलाकातों को राजनीतिक चश्मे से पढ़ा जा रहा है।
भेंट का कोई संगठनात्मक पहलू था या यह साधारण राजनीतिक बातचीत, इसका उत्तर अधिकृत जानकारी सामने आने पर ही मिलेगा। तब तक यह मुलाकात मध्य प्रदेश भाजपा की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।



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