बालाघाट के बैगा अंचल में पिछले ढाई महीने से फैली बीमारी के पीछे के कारण क्या हैं? सीएम डॉ. मोहन यादव के इस अचानक दौरे और 25 साल के नक्सल इतिहास का पूरा इनसाइड एनालिसिस।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा अंचल में इन दिनों एक गंभीर बीमारी का भारी प्रकोप क्यों है, यह एक बड़ी जांच का विषय बन गया है। हमारी पड़ताल के मुताबिक, पिछले ढाई महीने से इस इलाके के लोग एक गंभीर और रहस्यमयी बीमारी की चपेट में हैं। इस संकट को भांपते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज बीमारी से प्रभावित गांवों का सीधा दौरा किया। उन्होंने बिरसा विकासखंड के बैगा बाहुल्य ग्राम कोरका और बोनदारी का दौरा कर जमीनी हकीकत परखी। एक सभा मंच पर मंत्रियों, विधायकों और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्होंने डेटा जुटाया। मुख्यमंत्री ने मृत बच्चों के संबंध में पूरी जानकारी ली और इलाके में कुपोषण दूर करने के लिए पोषण आहार की स्थिति पर चर्चा की। इस दौरान क्षेत्रीय विधायकों ने उन्हें वनाधिकार पट्टों और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक ढांचे की कमियां जानने के लिए प्रभावित परिवारों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने बीमार बैगा परिवारों से मिलकर उनका हालचाल जाना। ग्रामीणों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने उनके स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के नदारद रहने के बारे में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने यह भी परखा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ असल में पहुंच रहा है या नहीं। इस संवेदनशील दौरे के दौरान जब बैगा बहनों ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी, तो मुख्यमंत्री ने संकट की इस घड़ी में बहनों को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया।
दौरे के बाद मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के पिछड़ेपन का जो एनालिसिस किया, वह चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा कि यह बैगा अंचल लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा है। हमारी रिपोर्ट भी बताती है कि सुरक्षा कारणों से ही क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हुए और बुनियादी सुविधाएं लोगों तक नहीं पहुंच सकीं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब सरकार इस अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं, रोजगार के अवसरों और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पूरी गंभीरता के साथ काम करेगी।
मुख्यमंत्री ने बीमारी के कारण जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। हमारी पड़ताल बताती है कि प्रशासन पर भारी दबाव के चलते उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने तुरंत प्रभाव से मृत बच्चों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान कर दिया।
इस दौरान आदिवासी बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने एक बड़ा फैक्ट बताते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों में यह पहली बार है जब कोई मुख्यमंत्री और मंत्री इस कोर आदिवासी क्षेत्र में आए हैं। उन्होंने विश्लेषणात्मक रूप से कहा कि कांग्रेस शासनकाल में नक्सलियों ने एक मंत्री की हत्या कर दी थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कड़े नेतृत्व में नक्सलवादी आंदोलन को अब समाप्त कर दिया गया है।
इस इनसाइड दौरे के दौरान ग्राउंड जीरो पर पूरा सरकारी महकमा मौजूद था। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री उदयप्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके, सांसद भारती पारधी, और विधायक संजय उइके, गौरव सिंह पारधी, राजकुमार कर्राहे, मधु भगत मौजूद थे। इनके अलावा मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगतसिंह नेताम, पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य मौसम बिसेन, पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे और गौरीशंकर बिसेन सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।