आखिर एक सफल योजना को लेकर मुख्यमंत्री को ऐसा क्यों कहना पड़ा कि ये 'महंगी पड़ गई'? हमारी इस इनसाइड रिपोर्ट में जानिए इस बयान और बुंदेलखंड की असल हकीकत का पूरा सच।

मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना का गहराई से विश्लेषण करें, तो यह प्रदेश के खजाने पर एक बहुत बड़ा असर डालती है। भोपाल के रवींद्र भवन में रविवार को हुए बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बयान इसी सच्चाई को सामने लाता है। उन्होंने खुले मंच से स्वीकार किया कि सत्ता में आने के बाद ही उन्हें इस योजना की भारी आर्थिक जिम्मेदारी का सही अंदाजा लगा। उनका यह बयान इस बात का सीधा प्रमाण है कि सरकार को इस योजना को जारी रखने के लिए अपने बजट का कितना बड़ा हिस्सा डायवर्ट करना पड़ रहा है।
इस पूरे मामले की शुरुआत छतरपुर की जानी-मानी कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी के एक सीधे सवाल से हुई। उन्होंने सीएम से पूछा कि बहनों के बाद बेटियों के लिए क्या नया होने वाला है। इस सवाल ने सीएम को योजना की हकीकत बयां करने का मौका दे दिया। उन्होंने बेबाकी से कहा, “तुमको मालूम नहीं, लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई। मुझे क्या पता था मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है।” उनका यह 'भारी मार' वाला शब्द साफ बताता है कि राजकोष पर इसका कितना तगड़ा दबाव है।
आंकड़ों की बात करें तो शुरुआत में इस योजना के तहत महिलाओं को 1,000 रुपये दिए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। सीएम ने बताया कि इस बढ़ोतरी के दौरान सरकार को कई वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस भारी दबाव के बाद भी सरकार योजना को बंद या कम नहीं करेगी। उन्होंने मजाकिया तौर पर बिन्नू रानी को बताया कि अभी वह पात्र नहीं हैं, लेकिन उम्र होने पर उन्हें भी इस सिस्टम का लाभ मिलेगा।
बुंदेलखंड की जमीनी हकीकत का एनालिसिस करें तो वहां की समस्याएं दशकों पुरानी हैं। कार्यक्रम में एक युवा ने जब पूछा कि बुंदेलखंड की कौन सी समस्या 24 घंटे में हल हो सकती है, तो सीएम ने बहुत ही तार्किक जवाब दिया। उन्होंने माना कि ऐसी पुरानी समस्याओं को 24 घंटे में तो भगवान भी हल नहीं कर सकते। हालांकि, उन्होंने बुंदेलखंड के युवाओं के टैलेंट का पूरा समर्थन किया और कहा कि सरकार का काम उन्हें सही प्लेटफॉर्म और मौके देना है।
बुंदेलखंड का सबसे बड़ा संकट वहां का सूखा और पलायन है। हमारी रिपोर्ट के मुताबिक, सिंचाई और रोजगार न होने के कारण वहां के लोग दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं। सीएम ने इस बड़ी समस्या के समाधान के रूप में 'केन-बेतवा' लिंक परियोजना को सामने रखा है। इस परियोजना का पूरा खाका तैयार है और सरकार का मानना है कि जब इस प्रोजेक्ट से सिंचाई का दायरा बढ़ेगा, तो इलाके में खेती अच्छी होगी, जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और पलायन हमेशा के लिए रुक जाएगा।