मध्य प्रदेश कैबिनेट द्वारा आपसी सहमति से जमीन अधिग्रहण पर 4 गुना मुआवजा देने और 12 नई सड़कों की मंजूरी का आर्थिक व प्रशासनिक विश्लेषण। जानिए कैसे 3,458 करोड़ के हाईवे से बदलेगी तस्वीर।
भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों का यदि गहराई से विश्लेषण किया जाए, तो यह साफ दिखता है कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार बढ़ाने और किसानों के असंतोष को न्यूनतम करने के लिए एक दोतरफा रणनीति अपनाई है। सरकार ने भूमि अधिग्रहण की पुरानी जटिल प्रक्रिया को पूरी तरह बदलते हुए आपसी सहमति से जमीन क्रय करने और चार गुना मुआवजा देने के मॉडल को हरी झंडी दी है। इसके साथ ही 3,458 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सिवनी-बालाघाट फोरलेन सहित 12 नई सड़कों को मंजूरी देकर राज्य के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने का खाका खींचा है।
हमारी पड़ताल से पता चलता है कि पूर्व में भूमि अधिग्रहण के मामलों में कानूनी विवादों और अदालती स्टे के कारण राज्य की कई बड़ी विकास परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती थीं। इस प्रशासनिक अड़चन को समाप्त करने के लिए सरकार ने सीधे बाजार मूल्य पर सहमति आधारित खरीद का रास्ता चुना है। किसान को चार गुना मुआवजा मिलने से वह स्वेच्छा से जमीन देने को तैयार होगा, जिससे अधिग्रहण का समय 70 प्रतिशत तक घटेगा और प्रोजेक्ट्स की लागत में समय के साथ होने वाली वृद्धि पर रोक लगेगी।
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत सिवनी-बालाघाट स्टेट हाईवे परियोजना का तकनीकी विश्लेषण बताता है कि 91.64 किलोमीटर लंबा यह मार्ग पेव्ड शोल्डर के साथ हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर तैयार किया जाएगा। 3,458 करोड़ रुपये की यह परियोजना महाकौशल और छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र की सीमा से लगे क्षेत्रों के बीच माल ढुलाई की लागत को कम करेगी। इसके अलावा 12 अन्य नई सड़कों की मंजूरी से राज्य के आंतरिक ग्रामीण व शहरी व्यापारिक केंद्रों के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक सुलभ हो जाएगा।
कैबिनेट के एजेंडे का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू युवाओं के लिए स्किलिंग का नया ढांचा तैयार करना है। नीति आयोग की रिपोर्ट का विश्लेषण कर सरकार उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को सीधे स्थानीय उद्योगों की मांग से जोड़ रही है। विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का ऐसा नेटवर्क बनाया जा रहा है जो युवाओं को वास्तविक बाजार की जरूरतों के अनुसार तैयार कर सके।
20 अगस्त से शुरू किए गए फार्मर आईडी अभियान की पड़ताल करने पर यह सामने आता है कि सरकार कृषि योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए एक एकीकृत डिजिटल रजिस्ट्री बना रही है। जमीनी स्तर पर राजस्व कर्मचारी किसानों तक पहुंचकर उनका डेटा एकत्र कर रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा किसानों से आईडी बनवाने की अपील का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के सीधे लाभ अंतरण (DBT) में बिचौलियों और फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करना है।
बैठक के अंतिम हिस्से में प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव और सुशासन के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। मुख्यमंत्री ने वर्षा के असंतुलन को देखते हुए अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में त्वरित राहत और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में कृषि प्रबंधन की पुख्ता योजना बनाने के निर्देश दिए। वहीं, पिछले तीन वर्षों के कैबिनेट फैसलों की समीक्षा में यह तथ्यात्मक आंकड़ा सामने आया कि लगभग 90 प्रतिशत निर्णयों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा चुका है, जो प्रशासनिक दक्षता को प्रमाणित करता है।