भोपाल में असदुद्दीन ओवैसी और रामेश्वर शर्मा के बीच हुए 'मिसाइल और जिन्ना' वाले विवाद का गहरा विश्लेषण। आखिर क्यों यूसीसी के विरोध में हुई एक जनसभा इतना बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बन गई?

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हाल ही में जो राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है, उसका यदि गहराई से विश्लेषण किया जाए तो यह ध्रुवीकरण की एक बड़ी बिसात नजर आती है। भोपाल के काजी कैंप पर 'मिसाइल गिराने' के पुराने बयान को लेकर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है। मंगलवार को यूसीसी (UCC) के विरोध में ओवैसी ने एक जनसभा में शर्मा को मिसाइल गिराने की चुनौती दी। इसके विश्लेषणात्मक जवाब में रामेश्वर शर्मा ने ओवैसी को 'जिन्ना की औलाद' बताकर इस विवाद को एक अलग ही राजनीतिक स्तर पर पहुंचा दिया है।
रामेश्वर शर्मा के पलटवार का विश्लेषण करें तो उन्होंने राष्ट्रवाद और आतंकवाद को सीधा मुद्दा बनाया है। ओवैसी की चुनौती स्वीकार करते हुए शर्मा ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि ओवैसी के पुर्खों के मुगालते भारत ने दूर किए हैं। शर्मा ने कहा कि भारत सरकार ने आतंकी ठिकानों पर प्रहार कर इस्लामाबाद की सरकार को भी तहस-नहस करने की ताकत के साथ मैदान में उतारा है। शर्मा का यह बयान साफ करता है कि वे ओवैसी के बयान को आतंकवाद और नक्सलवाद के बड़े नैरेटिव से जोड़कर उन्हें घेरना चाहते हैं और चेतावनी दी कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों पर मिसाइलें गिरेंगी।
इस पूरे विवाद में राहुल गांधी की एंट्री का विश्लेषण करना भी दिलचस्प है। शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से हिंदुस्तान में ओवैसी और राहुल गांधी जैसी 'जिन्ना की औलादें' भटक रही हैं और फैल रही हैं। यह बयान स्पष्ट रूप से कांग्रेस और एआईएमआईएम को एक ही पलड़े में तौलने और उन पर हिंदू-मुस्लिम तनाव चाहने का आरोप लगाकर वोट बैंक को मजबूत करने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।
चुनावी दृष्टिकोण से विश्लेषण करें तो रामेश्वर शर्मा का यह बयान मध्य प्रदेश के आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि ओवैसी चाहे जहां खड़ा हो या भागे, शर्मा वहां पहुंच सकता है। उन्होंने सरदार पटेल द्वारा हैदराबाद के नवाब से चुपचाप हस्ताक्षर करवाने का इतिहास याद दिलाया और कहा कि इस्लामाबाद में भी तिरंगा फहरेगा और वंदेमातरम गाया जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि शर्मा ने ओवैसी को मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने की खुली चुनौती देकर उन्हें क्लीन बोल्ड करने और धूल चटाने की बात कही है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर चल रही बहस का विश्लेषण करें तो शर्मा ने बाबा साहब अंबेडकर के विजन का सहारा लिया है। उन्होंने ओवैसी से कहा कि वे कांग्रेस की भाषा न बोलें और पूछा कि क्या उन्हें भारत के कानून से नफरत है? शर्मा ने आरोप लगाया कि हिंदू का वोट लेने के लिए सब राजनीति कर रहे हैं लेकिन हिंदू कानून नहीं मान रहे। उन्होंने ओवैसी पर आरोप लगाया कि वे मुल्ला-मौलवियों का समर्थन कर मुस्लिम बहनों के साथ 'हलाला' जैसा अन्याय बनाए रखना चाहते हैं, जिसे वे हरगिज नहीं होने देंगे।
इस पूरे विवाद की जड़ में ओवैसी की मंगलवार की जनसभा है। ओवैसी ने भड़कते हुए कहा था, 'रामेश्वर शर्मा तुम अगर माई के लाल हो तो काजी कैंप पर मिसाइल गिराकर दिखाओ। मैं अकेला वहां खड़ा रहूंगा। मैं शहीद होने को तैयार हूं।' ओवैसी ने कहा कि वे तुम लोगों के सामने झुकने वाले नहीं हैं। ओवैसी का यह बयान—कि शर्मा सिर्फ खाना खाने के बाद भोपाल में मिसाइल गिरा सकते हैं—स्पष्ट रूप से मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की आक्रामक रणनीति का हिस्सा था।