रीवा में मुर्दाघर को लेकर अभय मिश्रा के आरोपों पर जनार्दन मिश्रा के पलटवार से MP Politics गरमाई, दोनों नेताओं के बयानों से विवाद बढ़ा।

मध्यप्रदेश का रीवा इन दिनों सिर्फ अपने इतिहास और विंध्य की पहचान के लिए नहीं, बल्कि नेताओं की बयानबाजी के लिए भी चर्चा में है। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा और रीवा से बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा के बीच जुबानी जंग ने अब राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। मामला संजय गांधी मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर को लेकर विधायक अभय मिश्रा की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों से शुरू हुआ, जिसके बाद बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा ने बेहद तीखे अंदाज में पलटवार किया।
दरअसल, कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने संजय गांधी मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर को लेकर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। विधायक की ओर से महिलाओं के शवों के साथ दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोपों का जिक्र किया गया। इन बयानों के सामने आने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक गलियारों में पहुंच गया। हालांकि, ऐसे गंभीर आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य और आधिकारिक जांच का सामने आना जरूरी है।
अभय मिश्रा के आरोपों पर बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा ने तीखा पलटवार किया। सांसद ने विधायक पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उनकी मानसिकता पर सवाल उठाए और उन्हें ‘यौन विकृतियों से पीड़ित’ तक कह दिया। सांसद का कहना था कि बिना साक्ष्य इस तरह के गंभीर आरोप लगाना संजय गांधी अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की छवि को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से रीवा जैसे शहर की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है।
विवाद सिर्फ मुर्दाघर तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की ओर से मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के पिता स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल के व्यवसाय को लेकर की गई टिप्पणी पर भी बीजेपी सांसद ने प्रतिक्रिया दी। जनार्दन मिश्रा ने कहा कि उनके व्यवसाय को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं है और उन्होंने इसे राजनीतिक मर्यादा से जोड़ते हुए कांग्रेस विधायक पर निशाना साधा।
इसके बाद सांसद जनार्दन मिश्रा ने अभय मिश्रा के कथित पुराने अतीत को लेकर भी कई आरोप लगाए। सांसद ने दावा किया कि विधायक ने शुरुआती दौर में स्टेपनी चोरी और स्टेट बैंक में पॉकेटमारी जैसी घटनाओं से अपना कारोबार शुरू किया था। उन्होंने कोतवाली थाने में अपराधियों की तस्वीरें लगाए जाने का जिक्र करते हुए अभय मिश्रा को लेकर भी एक दावा किया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की जा रही है और इन्हें सांसद के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
रीवा की राजनीति में एक बात तो साफ दिख रही है - मुद्दा चाहे अस्पताल का हो, विकास का हो या फिर नेताओं के पुराने राजनीतिक हिसाब-किताब का, बात अब सीधे व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच रही है। बघेली धरती पर सियासत कुछ ऐसी गरम हुई है कि बयान का जवाब बयान से और आरोप का जवाब उससे भी तीखे आरोप से दिया जा रहा है।
एक तरफ कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा अपने आक्रामक अंदाज में जवाब दे रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुर्दाघर को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कब होगी और सच सामने कब आएगा ?
संजय गांधी मेडिकल कॉलेज रीवा का मामला अब सिर्फ एक अस्पताल से जुड़ा विवाद नहीं रह गया है। यह प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन चुका है। जनता के लिए जरूरी यह है कि नेताओं की बयानबाजी से अलग, जिन आरोपों की जांच जरूरी है उनकी निष्पक्ष जांच हो और अगर आरोप गलत हैं तो उनकी भी स्पष्टता सामने आए।
फिलहाल रीवा में सियासी पारा चढ़ा हुआ है और दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग आगे और कितनी बढ़ती है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।